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हर घंटे एक लीटर या ज्यादा पानी पिना खतरनाक

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वा‎शिंगटन । एक्सपर्टस की माने तो ज्यादा पानी पीना भी कई खतरों को बुलावा देता है, यहां तक कि कई बार ये मौत की वजह भी बन सकता है। इसे वॉटर इनॉक्सिकेशन या वॉटर पॉइजनिंग भी कहते हैं। अभी तक ऐसा कोई डाटा नहीं मिला है, जो बता सके कि अधिकतम कितना पानी मौत या अस्पताल जाने की नौबत ला सकता है लेकिन अनुमान है कि लगातार कई घंटों तक हर घंटे एक लीटर या ज्यादा पानी पिया जाना खतरनाक है। ये पानी का ओवरडोज है, जो शरीर में खून में ऑक्सीजन संतुलन गड़बड़ा देता है।कुछ सालों पहले कैलीफोर्निया में 28 साल की एक स्वस्थ युवती की पानी के ओवरडोज से मौत हो गई। साइंटिफिक अमेरिकन वेबसाइट में इस घटना का हवाला है। असल में युवती एक प्रोग्राम में पानी पीने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई थी। होल्ड यूअर वी फार ए वी नाम के इस प्रोग्राम में आकर उसने तीन घंटे में 6 लीटर पानी पी डाला। जेनिफर स्ट्रेंज नामक इस प्रतियोगी को कुछ ही समय में उल्टियां होने लगीं, तेज सिरदर्द शुरू हुआ और अगले ही रोज उसकी मौत हो गई। इसकी वजह वॉटर इनटॉक्सिकेशन बताई गई, यानी जरूरत से ज्यादा पानी पीना। शरीर में अतिरिक्त पानी जाने पर क्या होता है- इसपर एक शोध किया। इसमें पाया गया कि मैराथन धावकों का छठां हिस्सा किसी न किसी तरह से हाइपोनेट्रिमिया का शिकार होता है, यानी उनके शरीर में पानी के ज्यादा होने की वजह से खून पतला हो जाता है और ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। हाइपोनेट्रिमिया लैटिन और ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है खून में लवण की कमी का होना। सोडियम कम होना टर्म तो बहुतों ने सुना होगा। ये वही है। शरीर में पानी की अधिकता होने पर शरीर में सोडियम घट जाता है। हालांकि सोडियम कम होने के लिए कई बार दूसरी चीजें और कई बीमारियां भी जिम्मेदार होती हैं, लेकिन पानी की अधिकता भी इसका एक कारण है। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रति लीटर खून में 135 से 145 मिलीमोल्स सोडियम कंसेंट्रेशन होना चाहिए। हाइपोनेट्रिमिया में 135 से भी कम हो जाता है। ऐसे में होता ये है कि किडनियां ज्यादा पानी को प्रक्रिया में नहीं ले पातीं। किडनियों से न छन पाने के कारण ये पानी खून में शामिल होकर खून को पतला करने लगता है। खून के साथ ही ये कोशिकाओं में शामिल हो जाता है, जिससे सूजन के लक्षण दिख सकते हैं। एक 1 लीटर से ज्यादा पानी पिया जाएं तो किडनियों पर दबाव काफी ज्यादा हो जाता है, और उनकी काम की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में ही खून पतला होने लगता है। सोडियम की कमी से मरीज को सिरदर्द, थकान, मितली, बार-बार पेशाब जाना जैसे लक्षण दिखते हैं। थकान बहुत बढ़ जाती है। और सोडियम की जांच तुरंत न हो तो मरीज याददाश्त जाने या मस्तिष्क-संबंधी किसी बीमारी का शिकार हो सकता है। वैसे हाइपोनेट्रिमिया से पहले एक और स्थिति आती है, जिसे पार करने के बाद ही मरीज यहां पहुंचता है, इसे ओवरहाइड्रेशन कहा जाता है।

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