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अंबानी के घर के बाहर मिली स्कॉर्पियों के मालिक ने मौत से एक दिन पहले उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था

मुंबई । मुंबई में मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली स्कॉर्पियों गाड़ी के मालिक हीरेन मनसुख ने मौत से एक दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों द्वारा परेशान किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने अपने पत्र में राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और पुलिस प्रमुख से कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग भी की थी। मनसुख का शव शुक्रवार को ठाणे में एक नाले के किनारे पड़ा मिला था। फिलहाल हादसे में मौत का मामला दर्ज किया गया है।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि मामला महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते को ट्रांस्फर कर दिया गया है। इससे पहले अनिल देशमुख ने एक बयान में बताया था कि यह कार हीरेन देशमुख की नहीं थी। कार सैम म्यूटेब नाम के शख्स के नाम पर दर्ज है, हीरेन ने इस कार का इंटीरियर का काम किया था। मनसुख एक कार पार्ट्स का व्यापारी है, जिसने हाल ही में कार चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। देशमुख के अनुसार, मनसुख ने इस कार को उसके असली मालिक को नहीं लौटाया था क्योंकि कार मालिक ने काम करवाने के पैसे नहीं दिए थे।
इन सबके बीच एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। गुरुवार के इस फुटेज में मनसुख अपने घर के बाहर टहलते हुए दिखाई दे रहे हैं। 2 मार्च को अपने पत्र में मनसुख ने बताया था कि कैसे उसकी कार चोरी हुई थी और किस तरह से उसे पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेन्द्र फड़णवीस ने मुंबई में पत्रकारों से कहा कि मुख्य गवाह की मौत से संकेत मिलता है कि कुछ गड़बड़ है। उन्होंने कहा कि मैं मांग करता हूं कि मामले की जांच एनआईए को सौंपी जाए।
इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ‘छवि’ और ‘प्रतिष्ठा’ के लिए जरूरी है कि एंटीलिया केस में संदिग्ध हीरेन मनसुख की रहस्यमय मौत से पर्दा उठे।
राउत ने संवाददाताओं से कहा कि मनसुख की रहस्यमय मौत ‘निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण’ है। उनके स्कॉर्पियो वाहन का इस्तेमाल अंबानी के आवास के पास विस्फोटक रखने में किया गया था। उन्होंने कहा, “उनकी मौत का राजनीतिकरण करना और सरकार को घेरना गलत है। इस बात पर संदेह है कि मनसुख की मौत आत्महत्या थी या हत्या। मामले में वह महत्वपूर्ण गवाह थे।”
उन्होंने कहा, ‘‘गृह विभाग को जल्द से जल्द सच्चाई का पता लगाना चाहिए। यह महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार की प्रतिष्ठा और छवि के लिए महत्वपूर्ण है।”
राउत ने कहा कि विपक्षी दल भाजपा मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री ने मामले को एटीएस को सौंप दिया है, जो इसे सुलझाने में सक्षम है। हमें विश्वास करना चाहिए।”
इस बीच, भाजपा नेता आशीष शेल्लार ने शिवसेना नीत सरकार पर निशाना साधा और मनसुख के पोस्टमॉर्टम के समय ‘‘मुठभेड़ विशेषज्ञ” सहायक पुलिस निरीक्षक की मौजूदगी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘मनसुख के पोस्टमॉर्टम के वक्त मुठभेड़ विशेषज्ञ की मौजूदगी संदिग्ध है क्योंकि वह न तो ठाणे पुलिस में हैं, न ही एटीएस में, जो मामले की जांच कर रही है। इससे यह पता चलता है कि यह सरकार कुछ छिपाना चाहती है।”
शेल्लार ने मामले की जांच में ‘‘यू-टर्न” लेने के लिए गृह मंत्री की भी आलोचना की। उन्होंने पूछा, ‘‘गृह मंत्री ठाणे और मुंबई पुलिस और उनकी उपलब्धियों की प्रशंसा कर रहे थे, लेकिन आधे घंटे के अंदर ही उन्होंने जांच एटीएस को सौंप देने की घोषणा की। तो आधे घंटे में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें जांच एटीएस को सौंपनी पड़ी?” महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने मांग की कि मामले की जांच किसी निवर्तमान न्यायाधीश से कराई जाए।

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