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समस्त वेसु श्वे. मू. पू. जैन संघ स्थित आ. ओमकारसुरीजी आराधना भवन वेसू का सुंदर नजराना बनने जा रहे हैं।

समस्त वेसु श्वे. मू. पू. जैन संघ स्थित आ. ओमकारसुरीजी आराधना भवन वेसू का सुंदर नजराना बनने जा रहे हैं। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद यह अपूर्व क्षण आया है। भूमिग्रहण, भूमिपूजन और उद्घाटन जैन आचार्य पू. भाग्येशविजयसुरिजी पूज्य प्रवर पद्मदर्शनविजयजी महाराज आदि श्रवण श्रवणी भगवंतो की पावन निश्रा में संगीत सम्राट आकाश शाह के सुरीले स्वरों के साथ हुई। इस पावन अवसर को मिलने वाव समाज, डीसा समाज और साडत्रीशी समाज के मोवडीयो और प्रतिष्ठित व्यक्ति भारी संख्या में उपस्थित हुए। डॉक्टर संजय शाह ने तमाम कार्यक्रम का संचालन स्टेज से किया।
पू. आ. श्री. भाग्येशविजयसुरिजी ने प्रसंगोचित प्रवचन रुपी प्रसाद देते हुए कहा था कि, “ 18 समुदायों को उतारने के लिए आराधना भवन श्रेष्ठ गहना है। भूमि का यह श्रेष्ठ पुण्य है। पुण्य से अधिक और समय से पहले कुछ भी काम नहीं होता। इस साधना के स्थान के लिए बहुत से आचार्यों की दिव्य कृपा और वर्तमान भक्तियोगाचार्य पु.आ. श्री. यशोविजय सू. मा. और पू.आ.श्री मुनिचंद्रसूरी जी आदि का आशीर्वाद प्राप्त है। कार्य विशाल और बहुत बड़ा है। सभी समाजों के साथ और सहकार से यह सपना साकार होने जा रहा है। केला और कैरी, पेन और पेंसिल, नदी और सागर के पानी के बीच में जितना फर्क है इतना ही फर्क है संसारीओके फ्लैट और संयमियों के उपाश्रय के बीच। आसक्ति बढ़ाए वह फ्लैट है और अनाशक्त बनाएं बनाएं वह उपाश्रय हैं। पापाचार्य बढ़ाए वह फ्लैट और पुण्य की डोर मजबूत करें वह उपाश्रय है। प्रभु से दूर करें वह फ्लैट है प्रभु के नजदीक लाए वह उपाश्रय हैं, आत्मा से दूर करें वह फ्लैट है और आत्मा से नजदीक लाए वह उपाश्रय हैं। प्रभु के साथ मिलन कराए वह आराधना भवन है।

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