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वेसू में दीक्षार्थी देवेश के मधुर संगीत से श्रद्धालु सराबोर हो गए

सुरत भूमि, सूरत| शनिवार की शाम को वेसू क्षेत्र में मधुर और सुखदायक संगीत की धारा बह रही थी… विजयलक्ष्मी हॉल में तपस्या की धुनों का एक अनूठा सरगम ​​बज रहा था…एक के बाद एक भक्ति और तपस्या के गीतों ने हजारों भक्तों के मन को मंत्रमुग्ध कर दिया प्रस्तुत है…सरगम मंच के गायक-गीतकार मुमुक्षुरत्न देवेशकुमार, जिसमें त्रिवेणी संगम का निर्माण हुआ, अपने मधुर संगीत और आवाज से हर श्रोता के कानों में दुख घोल रहे थे…खचाखच भरा हॉल संगीत में डूब गया.. .हर किसी के मन में गूंज रहा है 'देवेश योग सरगम'.

अवसर पर दीक्षा युग के संस्थापक, पूज्य महापुरुष प.पू.भ. श्री विजयजी रामचन्द्रसूरीश्वरजी महाराजा की त्रिपदी से रंगा सूरत के रातडिया परिवार का रोम रोम में वर्षो पश्चात हो रहे दीक्षा का अवसर है। परिवार की चौथी पीढ़ी के युवराज संगीतकार दीक्षार्थी देवेश 18 से 22 अप्रैल तक अहमदाबाद में श्री शांति-जिन श्वे.मू तपागच्छ जैन संघ-अध्यात्म परिवार द्वारा आयोजित वीरव्रतोत्सव सामूहिक दीक्षा में दीक्षा लेंगे।

कृपा-प्रदत्त दीक्षा के महान नायक, श्रीमद् विजय योगतिलकसूरीश्वरजी महाराजा की आध्यात्मिक वाणी से 'सुरीशंती-जिन-संयम' वैरागी बन गये, 35-35 दीक्षार्थी संयममार्ग ग्रहण करेंगे।

इस दीक्षा मोहोत्सव से पहले देवेश के परिवार ने 30 और 31 मार्च को सूरत के विजयलक्ष्मी हॉल में 'देवेश योग सरगम' नाम से एक भव्य मोहोत्सव का आयोजन किया है. जिसके तहत पहले दिन शनिवार की शाम देवेशकुमार ने रजोहरण के समक्ष अपनी मधुर आवाज से सैकड़ों संयम प्रेमियों को संयम की धुन पर झूमने पर मजबूर कर दिया। यह शायद जैन धर्म का पहला उदाहरण है जिसमें दीक्षार्थी ने स्वयं संयमसुर को संगीत के माध्यम से गाया है!

शाम 7.30 बजे जब दीक्षार्थी देवेश विभिन्न वाद्य यंत्रों से सुसज्जित संगीत मंच पर पहुंचे तो पूरा हॉल जिनशासन के जयकारों से गूंज उठा। मंच की पृष्ठभूमि में एक तरफ संगीत वाद्ययंत्र और दूसरी तरफ दीक्षा का प्रतीक ओघा रखा गया था। मंच के दोनों ओर उस्ताद थे। ऐसे माहौल में जब देवेश ने मंच से शासन-प्रशासन के गीत गाए तो शासन-समर्थक एक अनोखे मूड में डूब गए. पूरे हॉल में एक सन्नाटा सा छा गया…केवल देवेश की आवाज और मधुर संगीत ही सभी को सचेत करने का आधार बन गया। श्री अजित-शांति गाथाओं और स्तुतियों के साथ संगीत यात्रा की मधुर शुरुआत हुई। बाद में, भक्ति छंदों का एक नॉन-स्टॉप मैशअप…गुरु भक्ति भाषण…कव्वाली…धाजा गाने…प्रसिद्ध दीक्षा गीत और अंत में देवेश द्वारा गाए गए 27 गानों का एक नॉन-स्टॉप मैशअप देखकर हर कोई भावविभोर हो गया। और संयमधर्म के 54 गीत विशेष रूप से योगकांक्षी गीत प्रस्तुत किए गए। इसे देवेश की धुन का जादू कहें या कुछ और…लेकिन लगातार तीन घंटे तक लोग अपनी सीट से नहीं उठे। देवेश अंत तक योग सरगम ​​के साथी बने रहे और हॉल भी तालियों की आवाज से गूंजता रहा…इस सुरीली यात्रा के बीच देवेश द्वारा रचित 27 शासनों के गीतों वाली पुस्तक का विमोचन भी हुआ. सम्पूर्ण संयम सूर स्पर्श का संवेदन प्रसिद्ध पारखी नैयसर, हितसार एवं रवीन्द्रभाई सी.ए. द्वारा किया गया। इससे पहले सुबह 9.30 बजे नीलेशभाई राणावत के संगीत के साथ अलौकिक स्नात्र मोहोत्सव हुआ।

आज विवाह समारोह और विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा।

दो दिवसीय महोत्सव में आज 31 तारीख को सुबह 7 बजे भव्य वर्षीदान यात्रा की दिव्य शोभा यात्रा निकलेगी. घोड़ा सम्प्रति पैलेस से विजयालक्ष्मी हॉल पहुंचेगा। प्रवचन के बाद सुबह 11 बजे स्वामीवात्सल्य और रात 8 बजे संयम शब्द स्पर्श के नाम से दीक्षार्थी का अद्भुत विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। जिसमें मशहूर संगीतकार शिवम सिंह संगीत देंगे.

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